राजकीय महाविद्यालय बनबसा में कबीर की अमृतवाणी और स्वच्छता का पावन संगम!

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आज, 11 जून, 2025 को हमारे राजकीय महाविद्यालय बनबसा का प्रांगण संत शिरोमणि कबीर दास जी की जयंती के दिव्य आलोक से आलोकित हो उठा। यह केवल एक जयंती समारोह नहीं था, अपितु कबीर के शाश्वत संदेशों को आत्मसात करने और उन्हें वर्तमान परिवेश में जीवंत करने का एक पुनीत अवसर बना। महाविद्यालय के समस्त छात्र-छात्राओं ने अपनी उत्साहपूर्ण सहभागिता से इस साहित्यिक एवं सामाजिक उत्सव को गरिमा प्रदान की।
इस अविस्मरणीय आयोजन की बागडोर हमारे ऊर्जावान एवं दूरदर्शी प्राचार्य, प्रोफेसर (डॉ.) आनंद प्रकाश सिंह ने संभाली। वहीं, हिंदी विभाग के मूर्धन्य विभागाध्यक्ष एवं प्राध्यापक, श्री हेम कुमार गहतोड़ी ने कबीर के दोहों और उनके जीवन दर्शन से ऐसा ज्ञान प्रस्फुटित किया कि हर हृदय में स्वच्छता, समरसता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति एक नई चेतना का संचार हुआ।
और इस ज्ञान यज्ञ की पूर्णाहुति के उपरांत, महाविद्यालय में प्रज्ज्वलित “स्वच्छता सप्ताह” और “पर्यावरण माह” (जो 5 जून से जुलाई तक चल रहा है) की अलख को और प्रदीप्त करते हुए एक वृहद स्वच्छता अभियान का शंखनाद किया गया। कबीर दास जी ने कहा है: “नारी तो हम भी करी, तब जाना यह भेद। दोऊ पाटन के बीच में, साबुत बचा न कोइ।” इसी प्रकार, हमने अपने परिसर को निर्मल बनाने के लिए, बिना किसी संशय के, अपने सामूहिक श्रम की आहुति दी। यह केवल औपचारिकता नहीं थी, अपितु अपने परिवेश के प्रति गहन प्रेम और समर्पण का प्रतीक था।
इस पुनीत कार्य में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकों – प्रोफेसर (डॉ.) मुकेश कुमार, डॉ. राजीव कुमार, डॉ. भूप नारायण दीक्षित, डॉ. सुशीला आर्या, और डॉ. सुधीर मलिक – का सक्रिय योगदान रहा। वहीं, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों में वरिष्ठ सहायक श्रीमती जयंती देवी, श्री त्रिलोक चंद्र कांडपाल, श्री सोनू, श्री विनोद कुमार चंद, और श्री अमर सिंह की उपस्थिति एवं अथक सहयोग ने इस आयोजन को सफल बनाने में अतुलनीय भूमिका निभाई। सभी के सामूहिक प्रयास और समर्पण ने इस आयोजन को न केवल भव्यता प्रदान की, बल्कि एक सशक्त संदेश भी दिया।
आज का यह दिवस राजकीय महाविद्यालय बनबसा के इतिहास में एक स्वर्णिम पृष्ठ के रूप में अंकित हो गया है, जहाँ कबीर के आध्यात्मिक ज्ञान की वर्षा हुई और साथ ही स्वच्छता के महायज्ञ में सबने अपनी आहुति दी। आइए, कबीर के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए, हम सभी अपने परिसर और परिवेश को सदैव स्वच्छ व सुंदर बनाए रखने का संकल्प लें!