॥ सृजन, संस्कृति और सौहार्द का महासंगम: राजकीय महाविद्यालय बनबसा का ‘उत्कर्ष-पर्व’ ॥

वर्ष 2025 की विदाई और नववर्ष 2026 के आगमन की इस पावन संधि-बेला पर आज राजकीय महाविद्यालय बनबसा, चंपावत का प्रांगण केवल एक शिक्षण संस्थान न रहकर, ‘आत्मीयता के एक वृहद परिवार’ में रूपांतरित हो गया। 🏛️ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आनंद प्रकाश सिंह के नेतृत्व और दूरदर्शी मार्गदर्शन में, हमने आज विगत वर्ष की उपलब्धियों का सिंहावलोकन किया और भविष्य के संकल्पों की नींव रखी। 📜
यह वर्ष हमारे लिए उपलब्धियों का ‘स्वर्ण-अध्याय’ रहा है, जहाँ महाविद्यालय ने सीमित संसाधनों के बावजूद सभी 6 विषयों में राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित कर अकादमिक जगत में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है, साथ ही एनएसएस (NSS) और अन्य पाठ्येतर गतिविधियों में भी सफलता के अनगिनत सोपान तय किए हैं। 🏆🎓
🤝 इस बौद्धिक और सांस्कृतिक अनुष्ठान की गरिमा बढ़ाने हेतु हमारे बीच प्रो. पंकज कुमार पांडे (प्राचार्य, रा.स्ना.महा. खटीमा), डॉ. हरेंद्र मोहन सिंह (प्राध्यापक, खटीमा) और डॉ. दिनेश कुमार गुप्ता (प्राध्यापक, अमोरी) उपस्थित रहे, जिनके सानिध्य और सुझावों ने हमारे विजन को और अधिक व्यापकता प्रदान की। 💡
लेकिन आज का दिन केवल अकादमिक विमर्श तक सीमित नहीं था; यह दिन था—’जड़ों से जुड़ने’ का। पूर्वी भारत की लोक-संस्कृति के वाहक ‘लिट्टी-चोखा’ के आयोजन ने महाविद्यालय के वातावरण को माटी की सौंधी महक और अपनत्व के रसों से सराबोर कर दिया। 🔥🍛
❤️ यह दृश्य अत्यंत भावविभोर करने वाला था जब महाविद्यालय छात्र संघ के ऊर्जावान पदाधिकारियों, समस्त प्राध्यापक वृंद और कर्मचारी साथियों ने पद-प्रतिष्ठा के भेद को मिटाकर, एक साथ आटा गूँथा, आग सुलगायी और भोजन पकाया। लिट्टी की सिकाई के साथ-साथ आज यहाँ दिलों के रिश्ते भी प्रगाढ़ हुए।
🫂 यह आयोजन भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) और हमारी साझी विरासत का वह जीवंत उदाहरण था, जिसने सिद्ध कर दिया कि जब ‘हाथ’ और ‘हृदय’ एक साथ मिलते हैं, तो संस्था ‘परिवार’ बन जाती है। 🇮🇳 इसी अटूट एकता, प्रेम और ‘गागर में सागर’ भरने वाले संकल्पों के साथ हम नववर्ष 2026 का स्वागत करते हैं। 🚀✨
​महाविद्यालय परिवार जिंदाबाद! 🇮🇳
राजकीय महाविद्यालय बनबसा, चंपावत (उत्तराखंड)